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टाइफाइड , मोतीझरा अथवा मियादी बुखार : एक खतरनाक बुखार,लक्षण,कारण और घरेलू इलाज, टायफाइड का शर्तिया घरेलू इलाज,(Typhoid Symptoms and Ayurvedic treatment)

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टाइफाइड या मोतीझरा अथवा मियादी बुखार : एक खतरनाक बुखार,लक्षण,कारण और घरेलू इलाज, टायफाइड का शर्तिया घरेलू इलाज,(Typhoid Symptoms and Ayurved...

टाइफाइड या मोतीझरा अथवा मियादी बुखार : एक खतरनाक बुखार,लक्षण,कारण और घरेलू इलाज, टायफाइड का शर्तिया घरेलू इलाज,(Typhoid Symptoms and Ayurvedic treatment)

Typhoid बुखार भारत में अधिक प्रमाण में पाया जानेवाला एक खतरनाक संक्रामक रोग हैं। इसे हिंदी में 'मियादी बुखार' नाम से भी जाना जाता हैं। टाइफ़ाईड ज्वर को आंत्रिक ज्वर भी कहा जाता है। हर वर्ष Typhoid बुखार के कारण लगभग 2 लाख से ज्यादा लोगो की मृत्यु होती हैं।

मोतीझरा या टाइफाइड एक खतरनाक बुखार है, इस बुखार का कारण 'साल्मोनेला टाइफी' नामक बैक्टीरिया का संक्रमण होता है। इस बीमारी में तेज बुखार आता है, जो कई दिनों तक बना रहता है। यह बुखार कम-ज्यादा होता रहता है, लेकिन कभी सामान्य नहीं होता।

इसका बैक्टीरिया छोटी आंत में स्थापित हो जाता है, लेकिन कभी-कभी यह पित्ताशय में भी स्थापित रहता है। यह वहीं अपनी संख्या बढ़ाकर विष फैलाता है और रक्त में मिलकर इस बीमारी का कारण बनता है।

मोतीझरा का इन्फेक्शन होने के एक सप्ताह बाद रोग के लक्षण नजर आने लगते हैं। कई बार दो-दो माह बाद तक इसके लक्षण दिखते हैं, यह सब संक्रमण की शक्ति पर निर्भर करता है।

टायफाइड या मोतीझरा के लक्षण (Symptoms of Typhoid) :

● मोतीझरा की शुरुआत सिर दर्द, बेचैनी तथा तेज बुखार के साथ होती है। साथ ही तेज सूखी खाँसी होती है और कुछ को नाक से खून भी निकलता है।

● मोतीझरा में बुखार 103 डिग्री से 106 डिग्री तक हो सकता है और यह बिना उतरे दो-तीन सप्ताह तक रहता है, इसमें तेज ठंड लगती है और मरीज काँपता रहता है।



● त्वचा पर मोती जैसी चमक लिये दाने उभर आते हैं।
इसके अलावा पेट दर्द, पेट फूलना, भूख न लगना, कब्ज बना रहना, छाती व पेट पर हलके रंग के दाने निकलते हैं जो दो-तीन दिन तक रहते हैं। कई रोगियों में हार्ट बीट मंद हो जाती है।

एक सप्ताह बाद पानी समान दस्त शुरू होते हैं, कुछ केस में दस्त में खून भी आता है, इससे रोगी कमजोर हो जाता है व उसके यकृत व प्लीहा का आकार बढ़ जाता है।

● इसके बाद तीसरे सप्ताह से बुखार कम होने लगता है व बाद में पूरी तरह उतर जाता है। समय पर इलाज न लेने से यह रोग आठ सप्ताह तक रह सकता है और जानलेवा होता है।

Typhoid या मियादी बुखार के निम्नलिखित लक्षण हैं :




◆ नियमित बढनेवाला तेज बुखार
◆ बदनदर्द
◆ कमजोरी
◆ सिरदर्द, पेट दर्द
◆ कम भूख लगना
◆ बच्चो में दस्त की शिकायत
◆ बड़ो में कब्ज की शिकायत
◆ बीमारी अधिक बढ़ जानेपर आंतो में अल्सर हो सकते है और इनके फट जाने पर operation की जरुरत पड़ सकती हैं।

टाइफाइड के कारण (Reason of Typhoid) :

◆ इसे सामान्य तरीके से हम यूँ भी समझा सकते हैं कि साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया केवल मानव में छोटी आंत में पाए जाते हैं। ये मल के साथ निकल जाते हैं। जब मक्खियाँ मल पर बैठती हैं तो बैक्टीरिया इनके पाँव में चिपक जाते हैं और जब यही मक्खियाँ खाद्य पदार्थों पर बैठती हैं, तो वहाँ ये बैक्टीरिया छूट जाते हैं। इस खाद्य पदार्थ को खाने वाला व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में आ जाता है।

◆ टाइफाइड बुखार का फैलाव संक्रमित पानी और खाद्यपदार्थ से होता हैं।

◆  टाइफाइड बुखार से पीड़ित व्यक्ति के मल, मूत्र और रक्त में यह बैक्टीरिया रहता हैं। पीड़ित व्यक्ति के मल-मूत्र से दूषित पानी के कारण Typhoid बुखार फैलने की अधिक संभावना रहती हैं।

◆  टाइफाइड बुखार दूषित पानी से नहाने से और ऐसे दूषित पानी से खाद्यपदार्थ धोकर खाने से भी फैलता हैं।

◆ यह बैक्टीरिया पानी में कई हफ्तों तक जीवित रह सकता हैं। लगभग 3% से 5% Typhoid बुखार से पीड़ित व्यक्ति कोई लक्षण न होने के बावजूद भी Typhoid बुखार फैला सकते हैं।

◆ टाइफाइड बुखार से पीड़ित व्यक्ति के झूटे खाने-पिने से भी टाइफाइड हो सकता हैं।

◆ टाइफाइड बैक्टीरिया से संक्रमित रक्त लगाने से भी हो सकता हैं।

◆ कई व्यक्ति ऐसे होते हैं, जिनके पेट में ये बैक्टीरिया होते हैं और उन्हें हानि नहीं पहुँचाते, बल्कि बैक्टीरिया फैलाकर दूसरों को रोग का शिकार बनाते हैं। ये लोग अनजाने में ही बैक्टीरिया के वाहक बन जाते हैं।

टायफाइड का घरेलू आयुर्वेदिक उपचार तथा बचाव का तरीका (Typhoid Ayurvedic Gharelu Treatment) :
उपरोक्त लक्षणों में से कोई भी लक्षण मिलता हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए और अपने मल-मूत्र की जाँच करानी चाहिए। मल-मूत्र की जाँच इसलिए कि मोतीझरा के लक्षण अन्य सामान्य रोग का भ्रम पैदा करने वाले होते हैं, रोगी भ्रम की अवस्था में रहता है, इलाज में गेप देता है और रोग तीव्र हो जाता है।

◆ इस रोग का वैक्सीन आज उपलब्ध है, यह बचपन में ही बच्चे को लगा दिया जाता है। बच्चे को 6 से 8 सप्ताह के अंतर से दो डोज लगाए जाते हैं। इसके बाद बच्चा तीन वर्ष का होने पर फिर एक बार टीका लगाना जरूरी होता है। इसका प्रभाव 60 से 75 प्रतिशत तक देखा जाता है।

◆ वर्तमान में मुँह से ली जाने वाली दवाएँ भी उपलब्ध हैं, इन्हें ओरल वैक्सीन कहते हैं।
◆ आधुनिक उपचार में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, पेट दर्द, बुखार तथा जो-जो तकलीफ हो, उनकी दवा दी जाती है।
◆ रोगी को दवा बगैर नागा दी जाए, उसे अलग कमरे में रखा जाए, रोगी की तथा उसके कमरे की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। हाथ हर बार साबुन से धोएँ।
◆ मोतीझरा ठीक होने के दो सप्ताह बाद यह फिर से हो सकता है, इसकी समय पर चिकित्सा न करने पर यह बढ़ता है और आंतों में छेद हो सकते हैं, आंतों से खून जा सकता है, जिससे पेरिटोनाइटिस रोग हो सकता है।
◆ मोतीझरा के साथ पीलिया हो सकता है, न्योमोनिया हो सकता है, मेनिन्जाइटिस, औस्टियोमाइलाइटिस तथा बहरापन भी हो सकता है।

घरेलु उपचार
निम्न वर्णित होम रेमेडीज से टायफ़ाईड ज्वर की समयावधि कम हो जाती है। आंतों में स्थित विजातीय पदार्थों का शीघ्र निष्कासन हो जाता हैं। रोगी की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्युन सिस्टम) में शक्ति आ जाती है। मैं बहुत साफ़ तौर पर बताना चाहूंगा कि माडर्न मेडीसीन, होम्योपेथिक या आयुर्वेदिक इलाज के साथ होम रेमेडीज लेने से रोग अति शीघ्र काबू में आ जाता है।

● पानी उबालें । उसमें दो चम्मच शहद मिलाकर बार-बार पीते रहें। टाईफ़ाइड में अत्यंत उपकारी है।बिना उबला पा नहीं पीना चाहिये। रोगी को पूर्ण विश्राम देना आवश्यक है।

●  रोगी को निरंतर सांत्वना देना बेहद आवश्यक है।

● रोगी को तरल भोजन जैसे जौ.मूंग की दाल का तरल और फ़लों का रस देना चाहिये। रोगी की आंतों को आराम देने के लिये भारी किस्म का गरिष्ठ भोजन कतई न लें। शुरु में हाई प्रोटीन डाईट देना हितकारी नहीं होगा।

● पेट में कोई असुविधा मेहसूस न हो तो दूध ले सकते हैं।

● भोजन पर्याप्त पका हुआ होना चाहिये। बासी भोजन कतई न करें।

● संतरे का रस पानी में मिलाकर उपयोग करें।इससे आंतों की पाचन क्रिया में सुधार होगा। इससे रोग प्रतिरोधक शक्ति में इजाफ़ा होता है ,पेशाब खुलकर आता है ,शरीर से विजातीय द्रव्य बाहर निकलते हैं,शरीर को पौषक पदार्थ मिलते हैं।

● टाईफ़ाइड ज्वर में लहसुन अत्यंत उपकारी है। इसे खाली पेट लेना उत्तम है। इससे रक्त के श्वेत कण ताकतवर बनते हैं जो रोग उन्मूलन में मददगार साबित होते हैं। २-४ लहसुन की कली बारीक काटकर १०० ग्राम दूध में ऊबालकर उपयोग करें।

● हल्दी में रोगाणु नाशक गुण होते हैं। दूध में आधा चम्मच हल्दी उबालकर पीना कर्तव्य है।

● तुलसी के पती १० नग,काली मिर्च ५ नग अच्छी तरह पीसकर गोली बनाकर गरम पानी के साथ निगल जाएं। अत्यंत गुणकारी उपाय है। दिन में दो तीन बार लेना चाहिये।

● ५-७ लौंग १ लिटर पानी में इतना ऊबालें कि आधा रह जाए। अब यह लौंग संस्कारित जल थोडा-थोडा करके पीते रहें। लौंग की औषधीय शक्ति से आंतों का संक्रमण दूर होगा। पाचन प्रणाली में सुधार होगा।

● एक चम्मच नमक तवे पर सेक लें।इसे एक गिलास जल में घोलकर धीरे-धीरे पीयें। लाभदायक
नुस्खा है। एक घंटे बाद थोडा-थोडा सामान्य जल पीयें । टायफ़ाईड ज्वर जल्द ठीक होगा।

● पौषक तत्वों की पूर्ति के लिये सेवफ़ल का रस ,मौसंबी का रस और केले का उपयोग करना उचित है।

● धनिये की पत्ती का रस २ चम्मच एक गिलास खट्टी छाछ मे घोलकर दिन में तीन बार पीने से मोतीझला ज्वर शीघ्र ठीक होता है।

● एक पका केला १५ ग्राम शहद में मसलकर मिलाकर दिन में तीन बार कुछ रोज लेने से आशातीत लाभ होता है।

सामान्य आयुर्वेद चिकित्सा

गिलोय घनवटी
महासुदर्शन घनवटी

● छोटे बच्चो को आधी गोली
●  ८ से १० साल के बच्चे हैं तो एक एक गोली
● बड़े हैं तो २-२ गोली दिन में तीन बार दें |( सुबह दोपहर शाम )

बुखार ज्यादा है तो  ज्वर नाशक( पतंजलि ) अमृतारिस्ट 3 चम्मच बराबर जल से

दर्द रहने पर महायोगराज गुग्गुलु

पेटदर्द में शंख वटी चूसें

इनके साथ ही

बड़ों के लिए :-
●  मुनक्का(बीज निकाल लें ) (८-१० मुन्नका )
●  अंजीर (४-५ अंजीर)
● खूबकला (राइ से भी छोटा दाना जैंसा होता है ) (१ से २ ग्राम )
इनको लेकर पीस कर चटनी बना ले फिर शहद के साथ सुबह दोपहर शाम को खा ले

छोटे बच्चों के लिए :-
●  मुनक्का(बीज निकाल लें )(२-३ मुन्नका)
● अंजीर (१-२  अंजीर)
● खूबकला (१ ग्राम)

इनको लेकर पीस कर चटनी बना ले फिर शहद के साथ सुबह दोपहर शाम को खा ले

परहेज व सावधानियां :-

● खाने में परहेज करे |
● तला-गला न खाएं |

क्या खाएं :-
● दूध पियें (देशी गए का हो तो सबसे अच्छा  है )
● चीकू खाएं
● सेब खाएं
● पपीता खाएं
● मूंग की दाल का पानी या पतली मुंग की दाल खाएं |

टाइफाइड बुखार संबंधी अधिक जानकारी नीचे दी गयी हैं :

टाइफाइड बुखार का निदान / Diagnosis
टाइफाइड बुखार का निदान करने के लिए, टाइफाइड बुखार के लक्षण पाये जानेवाले व्यक्तिओ में निम्नलिखित जांच किये जाते है :

● Typhidot Test : रोगी के रक्त का नमूना एक किट में डालकर जांच की जाती हैं। इसका परिणाम Positive आनेपर टाइफाइड बुखार का निदान किया जाता हैं।

● Blood Culture : यह बिमारी के पहले हफ्ते में रक्त में टाइफाइड बुखार का बैक्टीरिया की मौजूदगी की जांच करने के लिए किया जाता हैं।

● Stool Culture : यह रोगी व्यक्ति के मल में टाइफाइड बुखार का बैक्टीरिया की मौजूदगी की जांच करने के लिए किया जाता हैं। 

● WIDAL Test : इस जांच में रोगी व्यक्ति के रक्त की जांच की जाती हैं। इसमें O और H antigen में 180 से ज्यादा अनुपात आने पर टाइफाइड बुखार का निदान किया जाता हैं।

● Sonography / Xray : पीड़ित व्यक्ति पेट को अधिक पेट दर्द और उलटी होने पर आंतो में अल्सर का निदान करने हेतु यह जांच की जाती हैं। 

इनके अलावा भी रोगी के समस्या अनुसार अन्य जांच की जा सकती हैं।

टाइफाइड बुखार से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियां रखनी चाहिए :

Typhoid vaccine / लसीकरण : Typhoid बुखार से बचने के लिए दो तरह की vaccine उपलब्ध हैं। पहले तरह की Typhoid vaccine में injection दिया जाता है। यह vaccine 2 वर्ष से ऊपर के आयु के व्यक्तिओ में ही दी जाती हैं। दूसरी तरह की Typhoid vaccine में 4 गोलिया दी जाती है जिसमे से एक गोली एक दिन छोड़कर (1, 3, 5, 7) खाना होता हैं। यह vaccine 6 वर्ष से ऊपर के व्यक्तिओ में ही दी जाती हैं। इन दोनों vaccine का असर 2 हफ्ते बाद होता है और Typhoid बुखार के खिलाफ कुछ प्रमाण में प्रतिरोध शक्ति का निर्माण होता हैं। याद रहे की यह दोनों vaccine से 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती हैं। 

पानी : पीने के लिए हमेशा स्वच्छ पानी का उपयोग करे। अगर घर में RO नहीं है तो पानी को कम से कम 1 मिनिट उबाले और बाद में ठंडा होने के बाद में ही उपयोग करे। अगर कही बाहर सफ़र कर रहे है तो बोतलबंद पानी का उपयोग करे। घर में सब्जी / फल को साफ़ करने के लिए भी स्वच्छ पानी का ही इस्तेमाल करे। बाहर मिलने वाले बर्फ का इस्तेमाल न करे।




हाथ धोना : हमेशा खाना बनाने या खाने से पहले और बाथरूम के बाद अच्छे साबुन से हाथ धोना चाहिए। हाथ धोते समय साबुन से अच्छा झाग बनाकर १५ सेकंड तक बहते पानी में हाथ अच्छी तरह से धोए और बाद में स्वच्छ कपडे से हाथ अच्छी तरह से साफ़ करे। नल बंद करने के लिए उसी साफ कपडे का इस्तेमाल करे जिससे हाथ को दुबारा दूषण (Contamination) न हो। अगर पानी उपलब्ध नहीं है तो अपने साथ हाथ साफ़ रखने के लिए Hand sanitizer पास रखे।

आहार : घर में बना स्वच्छ, गर्म और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। बाजार में और रस्ते पर बिकनेवाले आहार पदार्थो से परहेज करे।

रोगी : अगर आपको टाइफाइड बुखार हैं तो आपने हमेशा अपने हाथ साफ़ और स्वच्छ रखना चाहिए। आपके कपडे, चद्दर, तौलिया इत्यादि गर्म पानी और साबुन से धोना चाहिए। आपने अन्य खाद्य पदार्थो को नहीं छूना चाहिए और औरो के लिए खाना नहीं पकाना चाहिए। 

सामान्य तौर पर Typhoid बुखार का ईलाज कैसे किया जाता हैं ?
Typhoid बुखार का ईलाज करने के लिए Antibiotics का इस्तेमाल किया जाता हैं।

पहले के ज़माने लगभग 20% Typhoid बुखार के रोगियों की मृत्यु हो जाती थी परंतु अब ज्यादा असरदार Antibiotics का उपयोग करने के कारण सिर्फ 1 से 2% रोगियों की ही मृत्यु होती है और वह भी किसी बड़े complication के कारण होती हैं।

अगर पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा कमजोरी नहीं है और आहार अच्छे से ले रहा है तो घर पर भी Antibiotics दवा लेकर Typhoid बुखार का ईलाज किया जा सकता हैं। कम से कम 2 हफ्तों तक Typhoid बुखार की दवा लेना होता हैं।

अधिक कमजोरी और उलटी, दस्त इत्यादि समस्या होने पर हॉस्पिटल में दाखिल होकर ईलाज कराना जरुरी होता हैं।

Typhoid बुखार के कारण आंतो में अल्सर होने पर जरुरत पड़ने पर operation भी किया जाता हैं।

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